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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में वैदिककालीन शिक्षा की उपादेयता
Authors
डॉ. अजीत कुमार
Abstract
वैदिककालीन शिक्षा प्राचीन भारत की शिक्षा व्यवस्था थी, जिसका मुख्य उद्देश्य व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, नैतिक सामाजिक और आध्यात्मिक विकास करना था। इसके साथ साथ चरित्र निर्माण करना भी था। वर्तमान समय में भी इसके अनेक सिद्धांत शिक्षा को अधिक प्रभावी एवं मूल्य परक बनाने में उपयोगी होंगे। वैदिक शिक्षा में सत्य, अनुशासन, संयम, कर्तव्य, ईमानदारी, जैसे गुणों पर जोर दिया जाता था। आज के विद्यार्थी में इन सभी गुणों का होना नितांत आवश्यक है। वैदिक शिक्षा में गुरु और शिष्य के बीच सम्मानपूर्ण संबंध होता था। वैदिक शिक्षा में शरीर मन बुद्धि और आचरण के विकास पर ध्यान दिया जाता था। आधुनिक शिक्षा में भी शैक्षणिक ज्ञान के साथ खेल, योग, कला, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास पर ध्यान देने की जरूरत है। वैदिक शिक्षा में प्रकृति, वायु, जल और जीव जन्तुओं के प्रति सम्मान की भावना थी। वर्तमान पर्यावरण संकट के समय यह दृष्टिकोण पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण है। वैदिककालीन शिक्षा के मूल्यपरक एवं मानव केंद्रित सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं। आधुनिक शिक्षा यदि वैज्ञानिक ज्ञान के साथ वैदिक शिक्षा के श्रेष्ठ मूल्यों को अपनाये तो विद्यार्थियों का सर्वांगीण, नैतिक एवं जिम्मेदार व्यक्तित्व विकसित किया जा सकता है।
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Pages:464-465
How to cite this article:
डॉ. अजीत कुमार "वर्तमान परिप्रेक्ष्य में वैदिककालीन शिक्षा की उपादेयता". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 464-465
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