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VOL. 6, ISSUE 3 (2020)
वक्रोक्ति सिद्धांत की वर्ण-विन्यास तथा पद-पूर्वार्ध वक्रता का भारतीय विज्ञापनों में प्रयोग
Authors
संगीत रत्नायक
Abstract
प्रस्तुत शोधालेख में वक्रोक्ति सिद्धांत की वर्ण-विन्यास तथा पद-पूर्वार्ध वक्रता का भारतीय विज्ञापनों में प्रयोग किये जाने की उपयुक्तता का निरीक्षण किया गया है। इस अनुसंधान के लिए वक्रोक्ति सिद्धांत की वर्ण-विन्यास वक्रता, पद-पूर्वार्ध वक्रता के आठ भेदों - रूढ़िवैचित्र्य वक्रता, पर्याय वक्रता, उपचार वक्रता, विशेषण वक्रता, संवृत्ति वक्रता, वृत्ति वक्रता, लिंगवैचित्र्य वक्रता और क्रियावैचित्र्य वक्रता - तथा अंतर्जाल में प्रसारित भारतीय विज्ञापनों को आधार बनाया गया है। इसमें अध्ययन किया गया है कि चुनित भारतीय विज्ञापनों में वर्ण-विन्यास वक्रता तथा पद-पूर्वार्ध वक्रता के आठ भेद प्रयुक्त हुए हैं या नहीं। निष्कर्ष के रूप में यह बात प्रकट हुई कि चुनित नौ वक्रोक्तियों में से छः - वर्ण-विन्यास वक्रता; रूढ़िवैचित्र्य वक्रता, पर्याय वक्रता, उपचार वक्रता, लिंगवैचित्र्य वक्रता और क्रियावैचित्र्य वक्रता - विज्ञापनों में प्रयुक्त हुए हंै। उनमें से तीन वक्रोक्ति - विशेषण वक्रता, संवृत्ति वक्रता तथा वृत्ति वक्रता - विज्ञापनों में प्रयुक्त होते परिलक्षित न हुए। इस प्रकार यह परिणाम निकला कि विज्ञापनों को आकर्षित बनाने उर्पुक्त वक्रोक्तियों का बहुत बड़ा योगदान है। चुनित वक्रोक्तियों में से तीनों का प्रयोग न होने से यह बात प्रकट होती है कि अंतर्जाल में प्रसारित भारतीय विज्ञापनों में उपर्युक्त वक्रोक्तियों का पूरा प्रयोग नहीं हुआ है। अगर उनका पूरी तरह से प्रयोग किया जाए तो विज्ञापन अधिकाधिक सफल बनाये जा सकते सकते हैं।
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Pages:18-20
How to cite this article:
संगीत रत्नायक "वक्रोक्ति सिद्धांत की वर्ण-विन्यास तथा पद-पूर्वार्ध वक्रता का भारतीय विज्ञापनों में प्रयोग". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 6, Issue 3, 2020, Pages 18-20
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