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VOL. 12, ISSUE 4 (2026)
नारनौल का युद्ध एक ऐतिहासिक अध्ययन
Authors
किशोर कुमार, नीरज कुमार यादव
Abstract
यह अध्ययन 1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अंतर्गत घटित नारनौल के युद्ध को एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय ऐतिहासिक घटना के रूप में प्रस्तुत करता है। सामान्यतः 1857 के विद्रोह को केवल सैनिक विद्रोह के रूप में देखा गया, किंतु आधुनिक इतिहासकार इसे व्यापक जन-आंदोलन के रूप में स्वीकार करते हैं, जिसमें किसानों, जमींदारों, स्थानीय शासकों तथा आम जनता की सक्रिय भागीदारी रही। नारनौल का युद्ध इसी व्यापक संघर्ष का एक सशक्त उदाहरण है, जिसने हरियाणा क्षेत्र में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संगठित प्रतिरोध को स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त किया। इस संघर्ष में स्थानीय नेतृत्व, विशेष रूप से राव तुला राम एवं अन्य क्षेत्रीय वीरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। अध्ययन में यह दर्शाया गया है कि नारनौल का युद्ध केवल सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि यह स्थानीय स्वायत्तता, सांस्कृतिक अस्मिता और सामाजिक सम्मान की रक्षा का प्रतीक था। इसमें ग्रामीण जनता की सहभागिता ने इसे जनांदोलन का स्वरूप प्रदान किया। यह शोध द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है, जिनमें ऐतिहासिक ग्रंथ, शोध-पत्र, सरकारी अभिलेख और समकालीन विवरण सम्मिलित हैं। इस अध्ययन का उद्देश्य नारनौल के युद्ध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसके कारणों, घटनाक्रम और परिणामों का विश्लेषण कर उसके राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को रेखांकित करना है। यह शोध क्षेत्रीय इतिहास को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में जोड़ने का प्रयास करता है और यह सिद्ध करता है कि स्वतंत्रता की चेतना भारत के कोने-कोने में व्याप्त थी।
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Pages:97-102
How to cite this article:
किशोर कुमार, नीरज कुमार यादव "नारनौल का युद्ध एक ऐतिहासिक अध्ययन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 4, 2026, Pages 97-102
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