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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
खोरठा पद्य साहित्य में आधुनिकता, सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना और भाषाई विकास
Authors
उर्मिला कुमारी
Abstract
यह व्यापक शोध-पत्र खोरठा पद्य साहित्य के वैचारिक, संरचनात्मक और अंतःविषय आयामों का गंभीर व विश्लेषणात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। झारखंड के वृहद छोटा नागपुर और संथाल परगना भू-भाग में बहुसंख्यक आबादी द्वारा व्यवहृत खोरठा भाषा ने अपनी मौखिक लोक-धार्मिक और संवादात्मक प्राथमिकताओं से निकलकर आधुनिक लिखित साहित्य का एक सुदृढ़ और प्रौढ़ माध्यम बनने तक का दीर्घकालीन सफर तय किया है।
यह अध्ययन श्रीनिवास पानुरी, डॉ. ए. के. झा, शिवनाथ प्रमाणिक और श्याम सुंदर महतो श्सुकुमारश् जैसे युग-निर्माता साहित्यकारों की प्रतिनिधि कृतियों के माध्यम से खोरठा काव्य के अंतःकरण की थाह लेता है। गहन पाठकीय और समाजशास्त्रीय विश्लेषण यह रेखांकित करता है कि आधुनिक खोरठा कविता महज आंतरिक अनुभूतियों या बाह्य सौंदर्य-बोध की परिचायक नहीं है, बल्कि यह तीव्र औद्योगिक विस्थापन, उपेक्षित बहुजनों के शोषण, वर्गीय विषमता और भाषाई व सांस्कृतिक आधिपत्य के विरुद्ध एक मुखर सामाजिक-राजनीतिक प्रतिरोधी स्वर है। यह साहित्य झारखंड के विशिष्ट स्वदेशी लोकाचार, प्रकृति-प्रेम और अस्मितामूलक संघर्षों को वैष्विक अकादमिक फलक पर स्थापित करने की पूरी क्षमता रखता है।

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Pages:386-388
How to cite this article:
उर्मिला कुमारी "खोरठा पद्य साहित्य में आधुनिकता, सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना और भाषाई विकास". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 386-388

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खोरठा पद्य साहित्य में आधुनिकता, सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना और भाषाई विकास | International Journal of Humanities and Social Science Research