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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 11, ISSUE 3 (2025)
रेवाड़ी के नगरीकरण का सांस्कृतिक प्रभावः एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
रवीना, डॉ. आशा कुमारी सिंह
Abstract
रेवाड़ी नगर हरियाणा राज्य का ऐतिहासिक नगर है। यह नगर अपने इतिहास, सांस्कृतिक विकास व प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए प्रसिद्ध है। रेवाड़ी नगर को किसी विशेष योजना के अनुसार नहीं बसाया गया है बल्कि यह नगर गावों का ही परिवर्तित व विकसित रूप है। कालांतर में आवश्यकता अनुसार बाजार व मंडियों की स्थापना, व्यापार-वाणिज्य संबंधी गतिविधियों ने रेवाड़ी के नगरीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रेवाड़ी के नगरीकरण की प्रक्रिया ने बीतें कुछ दशकों में व्यापक परिवर्तन लाए हैं। यह परिवर्तन न केवल भौतिक संरचना में दिखाई देते हैं, बल्कि रेवाड़ी की सांस्कृतिक पहचान पर भी गहरा प्रभाव डाला है। पहले रेवाड़ी की संस्कृति ग्रामीण जीवन शैली, पारंपरिक रीति-रिवाज, मेलों, लोक गीतों व सामाजिक एकता पर आधारित थी। यहाँ के लोग पारंपरिक वेशभूषा, भाषा एवं खानपान को महत्व देते थ,ें परंतु अब शहरीकरण के कारण इन परंपराओं में धीरे-धीरे गिरावट देखने को मिल रही है। आधुनिकता के भेष में पश्चिमी सभ्यता की झलक दिखाई देती है जिसने युवाओं को विशेषतयः प्रभावित किया है। आधुनिक भवनों, इमारतों, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, शिक्षण संस्थानों की बढ़ती संख्या ने जीवनशैली को पूरी तरह बदल दिया है। लोक कला, संगीत व नृत्य कला अब केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित रह गए हैं। हालांकि नगरीकरण से महिलाओ की स्थिति में सुधार, रोजगार के अवसर, क्षेत्रीय कलाओं को संरक्षण, शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है, परंतु इसके साथ ही रेवाड़ी की सांस्कृतिक जड़ों का भी क्षरण हुआ है। अतः आवश्यकता है की आधुनिकता के साथ सांस्कृतिक विरासत का भी संरक्षण किया जाए, जिससे रेवाड़ी नगर की वास्तविक पहचान बनी रहे।

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Pages:178-179
How to cite this article:
रवीना, डॉ. आशा कुमारी सिंह "रेवाड़ी के नगरीकरण का सांस्कृतिक प्रभावः एक विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 11, Issue 3, 2025, Pages 178-179

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रेवाड़ी के नगरीकरण का सांस्कृतिक प्रभावः एक विश्लेषणात्मक अध्ययन | International Journal of Humanities and Social Science Research