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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 11, ISSUE 3 (2025)
डिजिटल युग और हिंदी साहित्य
Authors
डॉ. किरण अग्रवाल
Abstract

डिजिटल क्रांति ने हिंदी साहित्य की अभिव्यक्ति, पहुँच और पाठक-संख्या को एक नया आयाम दिया है। 2010 से 2025 के कालखंड में हिंदी साहित्य की डिजिटल उपस्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। जहां 2010 में हिंदी जालस्थलों की संख्या लगभग 20 थी, वहीं 2025 तक यह 700 के पार पहुँच चुकी है। चिट्ठाकारी, ई-पुस्तकें, और मोबाइल अनुप्रयोग जैसे माध्यमों ने नवलेखकों के लिए अवसर और पाठकों के लिए सुविधाजनक पहुँच सुनिश्चित की है। प्रतिलिपि, कथा कहो, ब्लॉगर, और किंडल जैसे प्लेटफॉर्म इस क्रांति के प्रमुख स्तंभ हैं।

इस शोध में यह स्पष्ट रूप से देखा गया कि डिजिटल मंचों ने न केवल हिंदी साहित्य को संरक्षित किया, बल्कि उसे वैश्विक स्तर पर भी पहुँचाया है। महिला लेखिकाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के लेखकों की बढ़ती भागीदारी, मोबाइल उपयोगकर्ताओं में साहित्य के प्रति रुझान और ई-रीडिंग संस्कृति का विकास ये सभी साहित्य के लोकतंत्रीकरण की दिशा में मील के पत्थर हैं। इसके साथ ही, यह भी स्पष्ट हुआ कि डिजिटल सामग्री की गुणवत्ता, कॉपीराइट से जुड़ी चिंताएँ, और डिजिटल साक्षरता जैसे मुद्दे भी मौजूद हैं जिन्हें गंभीरता से सुलझाया जाना आवश्यक है।

भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और एनएलपी तकनीकों के उपयोग से साहित्यिक विश्लेषण और भी सटीक व गहराईपूर्ण हो सकता है। साथ ही, डिजिटल युग हिंदी साहित्य को एक समावेशी, संवादात्मक और वैश्विक स्वरूप प्रदान करने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।
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Pages:130-132
How to cite this article:
डॉ. किरण अग्रवाल "डिजिटल युग और हिंदी साहित्य". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 11, Issue 3, 2025, Pages 130-132
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