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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 11, ISSUE 3 (2025)
बालश्रम समस्या एवं मानवाधिकारवादी परिप्रेक्ष्य
Authors
कविता चौधरी
Abstract

बालश्रम एवं मानवाधिकारवादी अवधारणा समाज का अति संवेदनशील पहलू है क्योंकि बालक किसी राष्ट्र का भविष्य होता है। यदि उसके विकास की उन्नत स्थितियाँ पैदा नहीं की गई तो सम्पूर्ण देश का भविष्य अंधकारमय दिखाई देता है। सैद्धान्तिक रूप से बाल मानवाधिकारी का प्रतिपादन संवैधानिक एवं संविधानेत्तर संस्थाओं के माध्यम से किया गया है। लेकिन वर्तमान वैश्विकृत समय में बालश्रम एवं उनका उत्पीडन के आंकड़ों में निरन्तर वृद्धि होती दिखाई दे रही है। राष्ट्रीय, राज्य, अंतरराष्ट्रीय एवं सामाजिक सरोकार के अन्तर्गत इसके समापन के निरन्तर प्रयास किये जा रहे है। समय-समय पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सरकार को दिशा निर्देश जारी हो रहे हैं। इसके बावजूद बालश्रम एवं उनके मानवाधिकारवादी व्यवस्थाओं का उल्लंघन निरन्तर दिखाई दे रहा है।

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Pages:118-120
How to cite this article:
कविता चौधरी "बालश्रम समस्या एवं मानवाधिकारवादी परिप्रेक्ष्य". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 11, Issue 3, 2025, Pages 118-120
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