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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 11, ISSUE 3 (2025)
प्राचीन भारतीय विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक संगठन का विश्लेष्णात्मक अध्ययन (तक्षशिला, नालंदा और वल्लभी के विशेष सन्दर्भ में)
Authors
डॉ. रानी दुबे, आशुतोष उपाध्याय
Abstract
प्राचीन काल से ही भारतीय समझ में शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती चली आ रही है। यह लंबे समय से माना जाता रहा है कि शिक्षा ही मानव जाति की आध्यात्मिक और बौद्धिक उन्नति का एकमात्र मार्ग है। यह सत्य है कि शिक्षा से जानकारी प्राप्त होती है और शास्त्र तथा ज्ञान के परिणामस्वरूप मनुष्य अधिक ज्ञानवान बनता है और इस ज्ञान का उपयोग वह अपने व्यवहारिक जीवन में करता है स प्राप्त ज्ञान के अभ्यास से मनुष्य अपनी कला में पारंगत हो जाता है स शिक्षा के फलस्वरूप ही लोग सभ्य एवं सुसंस्कृत बनते हैं। संस्कृत साहित्य के नीति श्लोक में कहा गया है कि,“विद्यां ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम् अर्थात विद्या, या ज्ञान, विनम्रता प्रदान करती है, विनम्रता योग्यता प्रदान करती है, और यह योग्यता ही धन प्रदान करती हैं स शिक्षा को औपचारिक व अनौपचारिक दो तरीकों से दिया जाता है, प्राचीन समय में भारत के औपचारिक शिक्षा के केंद्र दो प्रकार से होते थे, अर्थात् गुरुकुल या वैदिक विद्यालय प्रणाली और मठ या विश्वविद्यालय शिक्षा प्रणाली। गुरुकुल मुख्यतः प्राथमिक शिक्षा का केंद्र था जो बाद में तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय के रूप में भी विकसित हुआ। लेकिन महाविहारों को संस्थागत केंद्र बनाया गया।
प्राचीन भारतीय शिक्षा मुख्यतः उच्च शिक्षा पर केन्द्रित है। प्राचीन भारत के प्रमुख विश्वविद्यालय नालंदा, तक्षशिला वल्लभी विक्रमशिला ओदंतपुरी इत्यादि थे। जो प्राचीन भारतीय शिक्षा के सन्दर्भ में सम्पूर्ण विश्व में अपने शिक्षा पद्धति सम्बंधित प्रतिमान में विख्यात थे। इन केंद्रों में रचनात्मकता और बौद्धिक स्वतंत्रता के युग को प्रतिबिंबित किया। प्राकृतिक और सांसारिक प्रसंगों को समझने की निरंतर जिज्ञासा ने प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली को उसके चरमोत्कर्ष पर पहुँचाया, जो इसके संगठित या विश्वविद्यालयीय शैक्षिक केंद्रों में परिलक्षित होता था। प्रस्तुत शोध आलेख में प्राचीन भारतीय विश्वविद्यालय तक्षशिला नालंदा एवं वल्लभी विश्वविद्यालयों के शैक्षिक संगठन का विश्लेष्णात्मक अध्ययन किया गया है जिसमे प्रमुख विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक संगठन जैसे शिक्षा का स्वरुप, विद्यालय का स्वरुप,पाठ्यक्रम, आवासीय व्यवस्था, गुरु -शिष्य सम्बन्ध, प्राचीन शासन व्यवस्था पर शिक्षा का प्रभाव तथा पाठ्यक्रम एवं पाठ्यक्रम से इतर गतिविधियों के प्रासंगिकता से संदर्भित विश्लेष्णात्मक अध्ययन किया गया है।
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Pages:87-91
How to cite this article:
डॉ. रानी दुबे, आशुतोष उपाध्याय "प्राचीन भारतीय विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक संगठन का विश्लेष्णात्मक अध्ययन (तक्षशिला, नालंदा और वल्लभी के विशेष सन्दर्भ में)". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 11, Issue 3, 2025, Pages 87-91
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