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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 11, ISSUE 3 (2025)
संविधान के अमृतकाल में युवाशक्ति का संकल्प: राष्ट्र सर्वोपरि, लोकतंत्र सर्वोच्च
Authors
Dr. Prateek Mali
Abstract

भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि राष्ट्र के नैतिक, सामाजिक और राजनीतिक जीवन की दिशा तय करने वाला एक जीवंत मार्गदर्शक है। यह न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता जैसे मूल्यों को समाज में स्थापित करने का आधार प्रस्तुत करता है। विशेषकर युवाओं की भूमिका संविधान की भावना को जीवित रखने और उसे व्यवहार में उतारने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। संविधान को केवल अध्ययन या परीक्षा की वस्तु न मानते हुए, उसे जीवन की पद्धति के रूप में अपनाना समय की आवश्यकता है। प्रस्तावना में वर्णित मूल्यों, विविधता में एकता, तथा नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता से ही राष्ट्र का सतत विकास और पुनर्निर्माण संभव है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् जैसे संगठनों द्वारा युवाओं को संविधान के मूलभूत आदर्शों से जोड़ने के प्रयास सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के लिए प्रेरक सिद्ध हुए हैं। यह लेख भारतीय संविधान की प्रकृति, उद्देश्य, और विशेष रूप से युवाओं की भूमिका को केंद्र में रखकर विचार प्रस्तुत करता है।

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Pages:92-95
How to cite this article:
Dr. Prateek Mali "संविधान के अमृतकाल में युवाशक्ति का संकल्प: राष्ट्र सर्वोपरि, लोकतंत्र सर्वोच्च". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 11, Issue 3, 2025, Pages 92-95
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