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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 7, ISSUE 1 (2021)
घरेलु हिंसा एक सक्षिंप्त परिचय
Authors
Harsh Kumar
Abstract
किसी भी देश की तरक्की उस देश के नागरिक के रहन सहन व विकास से नापी जाती है। तथा कुछ मुलभूत अधिकार व सुविधाओं से जैसे की समानता स्वतन्त्रता हो लेकिन भारतीय समाज में एक वर्ग ऐसा है। जो इन मुलभूत सुविधाओं के लिए आज भी सघर्षं कर रहा है। और एक विचित्र हिंसा का शिकार हो रहा है। जिसे हम घरेलु हिंसा कहते है। इस हिंसा के नाम पर समाज का एक वर्ग दुसरे वर्ग पर अत्याचार करता है। उसका मानसिक व सामाजिक व आर्थिक शोषण करता है इस तरह की हिंसा केवल भारत में ही नहीं अपितु विश्व के हर कोणे में देखने को मिलती है। विश्व सगंठनो ने इस प्रकार की हिसां को लिंग के आधार पर होने वाली हिंसा का नाम दिया है। जिसके परिणाम स्वरूप महिलाओं को मानसिक, शारीरिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। साथ ही वह इस तरह के कृत्यों से नजरबन्द व स्वतन्त्रता से वचिंत कर दी जाती है। घरेलु हिसां सार्वजनिक व निजी जीवन में होेने वाली हिसां दुनिया भर के घरो में प्रतिदिन होती है। घरेलु हिंसा एक गंभीर अपराध हैं यह कहना गलत नही होगा। की कुल मिलाकर 14 से 50 वर्ष के उम्र की लगभग एक तिहाई महिलाओं ने घरेलु हिंसा को किसी न किसी रूप में झेला ही होता है। यह चीज काफी निराशाजनक लगती है। जिस देश में महाकाव्यो में कवियो द्धारा महिलाओं को देवी समान बताया गया है। जहां देवी देवताओं की इतनी पुजा अराधना व सम्मान होता है। उस देश में महिलाओं के साथ इस तरह का व्यवहार होता है। घरेलु हिंसा के मु६े से निपटने के लिए चाहे कानुन है। परन्तु उसे सख्त व सही तरीके से लागू करने की आवश्यकता है।
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Pages:41-42
How to cite this article:
Harsh Kumar "घरेलु हिंसा एक सक्षिंप्त परिचय". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 7, Issue 1, 2021, Pages 41-42
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