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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 5, ISSUE 6 (2019)
बघेलखण्ड का शास्त्रीय संगीत एक परिचयात्मक विवेचन
Authors
अनामिका चंदानन, वाणी साठे
Abstract
बघेलखण्ड की धरती का संबंध प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं संगीत कला से रहा है। आदिकाल से ही बघेलखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर कला की पराकाष्ठा को दोहराता रहा है जिसमे संगीत जीवन से लेकर संस्कार तक भरा पड़ा है। बघेलखण्ड में संगीत साधना का उद्देश्य सत्यम शिवम् सुन्दरम् की कला विधान साधना को चरितार्थ करना रहा है। साथ ही बघेलखण्ड की शास्त्रीय गायन परम्परा - धु्रपद, धमाल, ख्याल, ठुमरी, टप्पा, दादरा, सादरा, कीर्तन आदि का प्रचलन समय-समय पर बघेलखण्ड की संगीत मंे रहा है। अर्थात बघेलखण्ड प्राचीन काल से ही संगीत साधना की स्थली रहा है जिसमें मधुर संगीत पुष्पित एवं पल्लवित होता रहा है एवं यहाँ की संगीत परम्परा का अनुसरण अन्य संगीत प्रेमियों ने किया तथा यहाँ की संगीत कला के प्रभाव से अन्य संगीत घरानांे का प्रादुर्भाव हुआ है।
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Pages:150-154
How to cite this article:
अनामिका चंदानन, वाणी साठे "बघेलखण्ड का शास्त्रीय संगीत एक परिचयात्मक विवेचन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 5, Issue 6, 2019, Pages 150-154
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