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VOL. 2, ISSUE 8 (2016)
चित्रकूट जनपद : पर्यटन केन्द्रों का प्रादेषिक वितरण और उनका महत्व
Authors
महेश चन्द्र कटियार
Abstract
पर्यटन केन्द्रों से आशय ऐसे स्थानों है, जो सजीवता, रमणीयता, अद्भुत-प्रकृति, रोमांच व आकर्षण जैसे गुणों से परिपूर्ण हो, लोगों के लिए ऐसे स्थान आदिकालसे ही ज्ञान, दर्शन, जिज्ञासा, कौतूहल आदि के विषय रहे है। पर्यटन के घटकों में स्थानीय दर्शनीय- स्थल, यातायात व संचार के साधन, आवास तथा मनोरंजन आदि का महत्वपूर्ण स्थान होता है। इसके साथ ही पर्यटकों को दी जाने वाली सुविधाएँ, आधारभूत सुविधाएँ - होटल, खानपान, क्रीड़ा, ऐतिहासिक भवन व इमारतें, खरीददारी - केन्द्र, वित्तीय संस्थाएँ, परिवहन क्षमता, अतिथि सत्कार संबंधी सुविधाएँ, यात्रा के दौरान सुविधाएँ व सरकार की भूमिका आदि का भी महत्व है।
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Pages:41-42
How to cite this article:
महेश चन्द्र कटियार "चित्रकूट जनपद : पर्यटन केन्द्रों का प्रादेषिक वितरण और उनका महत्व". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 2, Issue 8, 2016, Pages 41-42
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