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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 2, ISSUE 1 (2016)
भारतीय शिक्षा-दर्शन में रवीन्द्रनाथ टैगोर का योगदान
Authors
डाॅ. प्रज्ञा अग्रवाल
Abstract
टैगोर अत्यधिक सार्वभौमिक, विचारशील तथा पूर्ण व्यक्ति थे। उनकी विचारधारा ने विश्व को अनुप्राणित किया और अन्तर्राष्ट्रीय जगत में तो उनका योगदान अविस्मरणीय ही है। रवीन्द्रनाथ टैगोर मनुष्य को परमात्मा की सर्वश्रेष्ठ कृति मानते थे। उनका मंतव्य था कि राष्ट्रीयता के कारण विश्व-प्रेम विकसित नहीं हो पाता है, उन्होंने ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ का समर्थन किया और भारत तथा विश्व की समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीवाद की धारणा को प्रतिपादित किया। इसका प्रयोजन पूर्व तथा पाश्चात्य के संगम के अध्ययन के संयुक्त समागम में सत्य की अनुभूति करना तथा दो गोलाद्र्वो के मध्य विचारों स्वतन्त्र आदान-प्रदान के द्वारा विश्व शान्ति की मूल संभावनाओं को सशक्त करना है। टैगोर की विचारधारा में आदर्शवाद स्पष्ट रूप से प्रतिबिम्बित होता है। इनके अनुसार शिक्षा व्यक्ति का शारीरिक, बौद्विक, नैतिक और आत्यात्मिक विकास वैयाक्तिक एवं सामाजिक दृश्टिकोण से है।
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Pages:45-48
How to cite this article:
डाॅ. प्रज्ञा अग्रवाल "भारतीय शिक्षा-दर्शन में रवीन्द्रनाथ टैगोर का योगदान ". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 2, Issue 1, 2016, Pages 45-48
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